DocShare
Medieval India (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit

मराठा साम्राज्य (शिवाजी)

परिचय:

मराठा साम्राज्य की स्थापना छत्रपति शिवाजी महाराज ने 17वीं शताब्दी में की। यह साम्राज्य भारत में मुगलों और अन्य विदेशी शक्तियों के खिलाफ एक सशक्त हिंदू राज्य के रूप में उभरा। शिवाजी ने छापामार युद्धनीति (गनिमी कावा) का उपयोग कर मुगल साम्राज्य और दक्खन के सुल्तानों को चुनौती दी।


1. शिवाजी का प्रारंभिक जीवन और साम्राज्य की स्थापना

(i) प्रारंभिक जीवन:
  • शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग में हुआ।
  • उनके पिता शाहजी भोसले बीजापुर सल्तनत के सेनापति थे।
  • उनकी माता जीजाबाई ने उन्हें धार्मिक और सैन्य शिक्षा दी।
(ii) साम्राज्य की स्थापना:
  1. बीजापुर सल्तनत के खिलाफ अभियान:

    • 1645 में तोरणा किले पर कब्जा कर मराठा साम्राज्य की नींव रखी।
    • इसके बाद राजगढ़, सिंहगढ़, और पुरंदर किलों पर विजय प्राप्त की।
  2. अफजल खान की हत्या (1659):

    • बीजापुर के सेनापति अफजल खान को शिवाजी ने चालाकी से हराया और प्रतापगढ़ किले पर अधिकार कर लिया।
  3. मुगलों के खिलाफ संघर्ष:

    • 1664 में सूरत पर हमला कर अपार धन अर्जित किया।
    • मुगलों के साथ बार-बार टकराव।

2. शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था

(i) केंद्रीय प्रशासन:
  1. अष्टप्रधान मंडल:

    • शिवाजी ने अपने प्रशासन को व्यवस्थित करने के लिए आठ मंत्रियों का एक मंडल बनाया।
    • प्रमुख मंत्री:
      • पेशवा: प्रधान मंत्री।
      • अमात्य: वित्त मंत्री।
      • मंत्री: आंतरिक मामलों के प्रमुख।
      • सेनापति: सैन्य प्रमुख।
      • सचिव: पत्राचार और राजकीय आदेशों का प्रमुख।
      • सुमंत: विदेश मंत्री।
      • पंडितराव: धार्मिक और न्यायिक मामलों का प्रमुख।
      • न्यायाधीश: न्याय विभाग का प्रमुख।
  2. सूबेदारी व्यवस्था:

    • साम्राज्य को सूबों में विभाजित किया गया।
    • सूबेदार स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार थे।
(ii) राजस्व प्रणाली:
  1. चौथ और सरदेशमुखी:

    • चौथ: पड़ोसी राज्यों से लिया जाने वाला 25% कर।
    • सरदेशमुखी: कुल राजस्व का 10% कर।
  2. कृषि पर कर:

    • किसानों से केवल उपज का एक चौथाई भाग कर के रूप में लिया जाता था।
    • शिवाजी ने किसानों को सुरक्षा और सहायता प्रदान की।
(iii) न्याय व्यवस्था:
  • शिवाजी ने न्याय व्यवस्था को सरल और कुशल बनाया।
  • छोटे विवादों का निपटारा ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाता था।

3. सैन्य संगठन और गनिमी कावा (छापामार युद्धनीति)

(i) सैन्य संगठन:
  1. स्थायी सेना:

    • घुड़सवार और पैदल सेना पर विशेष ध्यान।
    • सैनिकों को नियमित वेतन दिया जाता था।
  2. किलों की सुरक्षा:

    • शिवाजी ने किलों को अपने साम्राज्य की रीढ़ बनाया।
    • रायगढ़, सिंहगढ़, और प्रतापगढ़ उनके प्रमुख किले थे।
(ii) गनिमी कावा (छापामार युद्धनीति):
  • दुश्मन पर अचानक हमला कर जीत हासिल करना।
  • इस युद्धनीति ने शिवाजी को शक्तिशाली शत्रुओं को हराने में मदद की।

4. शिवाजी और मुगलों के साथ संघर्ष

(i) सूरत पर हमला (1664):
  • शिवाजी ने सूरत के मुगल बंदरगाह पर हमला किया।
  • इस अभियान में उन्होंने अपार धन अर्जित किया, जिससे मराठा सेना को मजबूत किया गया।
(ii) पुरंदर की संधि (1665):
  • मुगल सेनापति राजा जयसिंह ने शिवाजी को हराया और संधि के लिए मजबूर किया।
  • शर्तें:
    • शिवाजी ने 23 किलों को मुगलों को सौंप दिया।
    • शिवाजी ने मुगल साम्राज्य की अधीनता स्वीकार की।
(iii) आगरा की घटना (1666):
  • शिवाजी को औरंगज़ेब के दरबार में बुलाया गया।
  • औरंगज़ेब ने उनका अपमान किया, जिससे शिवाजी ने आगरा से भागने की योजना बनाई।
  • वे एक बड़ी साजिश रचकर टोकरी में छिपकर फरार हो गए।
(iv) मुगलों पर विजय:
  • आगरा से लौटने के बाद, शिवाजी ने दोबारा किलों पर अधिकार किया।
  • उन्होंने मुगलों के खिलाफ स्वतंत्रता संघर्ष जारी रखा।

5. शिवाजी और दक्षिण भारत का विस्तार

(i) बीजापुर सल्तनत:
  • अफजल खान की हार के बाद बीजापुर के कई क्षेत्रों पर कब्जा किया।
  • शिवाजी ने बीजापुर की कमजोर स्थिति का लाभ उठाया।
(ii) गोलकुंडा और कर्नाटक:
  • शिवाजी ने गोलकुंडा के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए।
  • कर्नाटक के क्षेत्रों में विजय अभियान चलाकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया।
(iii) मराठा नौसेना का विकास:
  • शिवाजी ने एक मजबूत नौसेना का गठन किया।
  • कोकण और मालाबार तट पर मराठा प्रभुत्व स्थापित किया।
  • समुद्री किलों जैसे सिंधुदुर्ग और विजयदुर्ग का निर्माण किया।

6. शिवाजी का राज्याभिषेक और छत्रपति की उपाधि

(i) राज्याभिषेक (1674):
  • रायगढ़ में शिवाजी का भव्य राज्याभिषेक हुआ।
  • उन्हें "छत्रपति" की उपाधि दी गई।
  • यह राज्याभिषेक हिंदू गौरव और स्वतंत्रता का प्रतीक था।
(ii) प्रशासनिक सुधार:
  • राज्याभिषेक के बाद, शिवाजी ने अपने शासन को और संगठित किया।
  • राजस्व प्रणाली, न्याय व्यवस्था, और सैन्य संगठन में सुधार किए।

7. शिवाजी की मृत्यु और मराठा साम्राज्य का विस्तार

(i) शिवाजी की मृत्यु (1680):
  • शिवाजी का निधन 1680 में हुआ।
  • उनकी मृत्यु के बाद मराठा साम्राज्य अस्थिर हो गया।
(ii) संभाजी और मराठा संघर्ष:
  • शिवाजी के पुत्र संभाजी ने शासन संभाला।
  • संभाजी ने मुगलों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा।
  • 1689 में संभाजी को मुगलों ने बंदी बना लिया और उनकी हत्या कर दी।

8. शिवाजी की विरासत

(i) राजनीतिक विरासत:
  1. स्वराज का सिद्धांत:

    • शिवाजी ने हिंदवी स्वराज (स्वतंत्र राज्य) की अवधारणा को साकार किया।
    • उन्होंने स्थानीय प्रशासन और स्वायत्तता को प्राथमिकता दी।
  2. प्रशासनिक दक्षता:

    • अष्टप्रधान मंडल की स्थापना और संगठित प्रशासन।
    • कृषि और राजस्व प्रणाली को पुनर्गठित किया।
  3. क्षेत्रीय स्थायित्व:

    • मराठा साम्राज्य को एक मजबूत राजनीतिक आधार प्रदान किया।
    • किलों और नौसेना की मजबूत व्यवस्था की।

(ii) सांस्कृतिक विरासत:
  1. धार्मिक सहिष्णुता:

    • शिवाजी ने सभी धर्मों का सम्मान किया।
    • उन्होंने मस्जिदों और मुस्लिम धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
  2. स्थापत्य कला:

    • रायगढ़, सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग जैसे किलों का निर्माण।
    • जल और भूमि पर समान नियंत्रण के लिए किलेबंदी।
  3. मराठा गौरव:

    • हिंदू धर्म और संस्कृति को पुनर्जीवित किया।
    • मराठा साम्राज्य को एक सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीक के रूप में स्थापित किया।

9. मराठा साम्राज्य का विस्तार (शिवाजी के बाद)

(i) संभाजी (1681-1689):
  • शिवाजी के पुत्र संभाजी ने सत्ता संभाली।
  • उन्होंने मुगलों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा।
  • 1689 में संभाजी को मुगलों ने बंदी बना लिया और उनकी हत्या कर दी।
(ii) मराठा साम्राज्य का पुनरुद्धार:
  • संभाजी के बाद मराठा साम्राज्य कमजोर हुआ।
  • राजाराम और महारानी ताराबाई ने संघर्ष जारी रखा।
  • 18वीं शताब्दी में पेशवाओं के नेतृत्व में मराठा साम्राज्य ने पुनः शक्ति प्राप्त की।

10. मराठा साम्राज्य का प्रभाव

(i) मुगलों पर दबाव:
  • मराठा साम्राज्य ने मुगल साम्राज्य को कमजोर किया।
  • मराठाओं के बढ़ते दबाव के कारण मुगल साम्राज्य का पतन तेज हुआ।
(ii) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर प्रभाव:
  • शिवाजी की स्वराज की भावना ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरणा दी।
  • उनकी नीतियों और रणनीतियों को आधुनिक काल के नेताओं ने अपनाया।
(iii) सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव:
  • मराठा साम्राज्य ने हिंदू संस्कृति को सुदृढ़ किया।
  • समाज में समानता और न्याय का प्रचार किया।

निष्कर्ष:

शिवाजी ने न केवल मराठा साम्राज्य की नींव रखी, बल्कि भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता और आत्मसम्मान का प्रतीक बने। उनकी प्रशासनिक और सैन्य नीतियों ने एक सशक्त साम्राज्य की स्थापना की। शिवाजी की विरासत ने भारतीय समाज, संस्कृति और राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।


Unlock Full Unit & Study Features

Sign in to highlight text, create saved notes, ask the AI Tutor questions, and access all units.