DocShareDocShare
/Environmental Science (SSC, Railway, Police & All State exam)/Chapter 2
Environmental Science (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019 (India State of Forest Report 2019)

परिचय:

भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) 2019 को वन सर्वेक्षण विभाग (Forest Survey of India - FSI) द्वारा जारी किया गया। यह रिपोर्ट हर दो वर्ष में प्रकाशित होती है और इसका उद्देश्य देश में वन और वृक्षों की स्थिति का आकलन करना है।

  • प्रकाशन वर्ष: 2019
  • उद्देश्य: वन क्षेत्र, वृक्षावरण, जैव विविधता, और वनों की गुणवत्ता का मूल्यांकन।
  • महत्व: यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों को वनों के प्रबंधन और संरक्षण की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

वन और वृक्षावरण का क्षेत्रफल:

  1. भारत में कुल वन क्षेत्रफल (Forest Area):

    • 7,12,249 वर्ग किलोमीटर (देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 21.67%)।
  2. वृक्षावरण (Tree Cover):

    • 95,027 वर्ग किलोमीटर (देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 2.89%)।
  3. कुल वन और वृक्षावरण (Forest and Tree Cover Combined):

    • 8,07,276 वर्ग किलोमीटर (देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24.56%)।

वन श्रेणियां (Categories of Forests):

ISFR 2019 में वनों को उनकी घनत्व (Density) के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

  1. बहुत घने वन (Very Dense Forest):

    • क्षेत्रफल: 99,278 वर्ग किलोमीटर
    • वनावरण घनत्व: 70% से अधिक।
  2. मध्यम घने वन (Moderately Dense Forest):

    • क्षेत्रफल: 2,15,163 वर्ग किलोमीटर
    • वनावरण घनत्व: 40%-70%।
  3. खुले वन (Open Forest):

    • क्षेत्रफल: 3,04,499 वर्ग किलोमीटर
    • वनावरण घनत्व: 10%-40%।

प्रमुख राज्यों में वनावरण:

भारत के विभिन्न राज्यों में वनावरण का योगदान महत्वपूर्ण है। ISFR 2019 के अनुसार:

  1. सबसे अधिक वनावरण क्षेत्र वाले राज्य:

    • मध्य प्रदेश (77,482 वर्ग किलोमीटर)
    • अरुणाचल प्रदेश (66,687 वर्ग किलोमीटर)
    • छत्तीसगढ़ (55,611 वर्ग किलोमीटर)
  2. कुल भौगोलिक क्षेत्र में सबसे अधिक प्रतिशत वनावरण:

    • मिज़ोरम (85.41%)
    • अरुणाचल प्रदेश (79.63%)
    • मेघालय (76.33%)

वनावरण में वृद्धि और कमी:

वृद्धि:

  1. भारत के कुल वन क्षेत्र में 2017 की रिपोर्ट की तुलना में 3,976 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है।
  2. वृक्षावरण में 1,212 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है।
  3. राज्यों के स्तर पर, सबसे अधिक वन क्षेत्र वृद्धि वाले राज्य हैं:
    • कर्नाटक (+1,025 वर्ग किलोमीटर)
    • आंध्र प्रदेश (+990 वर्ग किलोमीटर)
    • केरल (+823 वर्ग किलोमीटर)

कमी:

  1. उत्तर-पूर्वी राज्यों में वनावरण में गिरावट दर्ज की गई।
  2. प्रमुख कमी वाले राज्य:
    • मणिपुर (-499 वर्ग किलोमीटर)
    • अरुणाचल प्रदेश (-276 वर्ग किलोमीटर)

वनावरण घनत्व मानचित्र:

रिपोर्ट में वनावरण का विस्तृत मानचित्र भी प्रस्तुत किया गया है, जिसमें वनों की स्थिति का भौगोलिक वितरण दर्शाया गया है।

वनावरण क्षेत्र का वितरण:

वन श्रेणीक्षेत्रफल (वर्ग किमी)प्रतिशत
बहुत घने वन99,27814%
मध्यम घने वन2,15,16330%
खुले वन3,04,49943%
वृक्षावरण95,02713%

वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण:

रिपोर्ट में वनों के प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह वनों की स्थिति को सुधारने और जैव विविधता को संरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।

वनों का प्रबंधन:

  1. सामुदायिक वनों का संरक्षण (Community Forests):

    • स्थानीय समुदायों को वन प्रबंधन में भागीदार बनाया गया।
    • वन संसाधनों के सतत उपयोग पर जोर।
  2. सामाजिक वनीकरण (Social Forestry):

    • गैर-वन क्षेत्रों में वृक्षारोपण।
    • स्थानीय लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहन।
  3. ज्वाइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट (JFM):

    • सरकार और स्थानीय समुदाय के बीच साझेदारी।
    • वनों के संरक्षण और पुनःस्थापना के लिए।

वन्यजीव संरक्षण:

  1. राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य:

    • भारत में कुल 104 राष्ट्रीय उद्यान और 566 वन्यजीव अभयारण्य हैं।
    • इनमें जैव विविधता और लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण होता है।
  2. बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserves):

    • 18 बायोस्फीयर रिजर्व स्थापित।
    • जैव विविधता के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति का संरक्षण।
  3. प्रमुख योजनाएं:

    • प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger): बाघों के संरक्षण के लिए।
    • प्रोजेक्ट एलीफेंट (Project Elephant): हाथियों के संरक्षण के लिए।

वनों का आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व:

आर्थिक महत्व:

  1. लकड़ी और ईंधन:

    • वनों से प्राप्त लकड़ी और जलाऊ लकड़ी ग्रामीण भारत की आवश्यकताओं को पूरा करती है।
  2. औषधीय पौधे (Medicinal Plants):

    • आयुर्वेद और औषधि उद्योग के लिए वनों का महत्वपूर्ण योगदान।
  3. गैर-लकड़ी उत्पाद (Non-Timber Forest Products):

    • गोंद, रेजिन, शहद, आदि।

पर्यावरणीय महत्व:

  1. जलवायु नियंत्रण:

    • वनों के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण।
    • जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में सहायता।
  2. मृदा संरक्षण:

    • कटाव को रोकना।
    • उपजाऊ मृदा को बचाना।
  3. जल चक्र में योगदान:

    • वर्षा और जल स्रोतों का संरक्षण।
  4. जैव विविधता संरक्षण:

    • पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखना।

उत्तर-पूर्वी राज्यों में वन स्थिति:

विशेष ध्यान:

भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों का वनों में सबसे अधिक योगदान है, लेकिन ISFR 2019 के अनुसार, इन राज्यों में वन क्षेत्र में गिरावट आई है।

प्रमुख कारण:

  1. झूम खेती (Shifting Cultivation):

    • पारंपरिक खेती की यह पद्धति वनों की कटाई का कारण बन रही है।
  2. निर्माण और विकास गतिविधियां:

    • बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वनों की कटाई।
  3. जलवायु परिवर्तन:

    • तापमान और वर्षा के पैटर्न में बदलाव।

आंकड़े:

  • मिज़ोरम: 85.41% वन क्षेत्र, लेकिन 180 वर्ग किमी की गिरावट।
  • अरुणाचल प्रदेश: 79.63% वन क्षेत्र, लेकिन 276 वर्ग किमी की गिरावट।

मैंग्रोव वन (Mangrove Forests):

विशेषताएं:

मैंग्रोव वन तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • वनों का कुल क्षेत्र: 4,975 वर्ग किमी।
  • कुल क्षेत्र में वृद्धि: 54 वर्ग किमी।

प्रमुख क्षेत्र:

  1. पश्चिम बंगाल (सर्वाधिक मैंग्रोव क्षेत्र)।
  2. गुजरात।
  3. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह।

पर्यावरणीय महत्व:

  1. तटीय क्षेत्रों को चक्रवातों और सुनामी से बचाना।
  2. समुद्री जैव विविधता का संरक्षण।

वन संसाधनों का सतत प्रबंधन (Sustainable Forest Management):

वन संसाधनों का सतत प्रबंधन वनों के दीर्घकालिक संरक्षण और उपयोग को सुनिश्चित करता है। ISFR 2019 में निम्नलिखित पहलुओं को रेखांकित किया गया है:

प्रमुख उपाय:

  1. समुदाय आधारित वन प्रबंधन (Community-Based Forest Management):

    • स्थानीय समुदायों की भागीदारी।
    • वनों की सुरक्षा के लिए पारंपरिक ज्ञान का उपयोग।
  2. वनों का पुनर्विकास (Forest Restoration):

    • कटे हुए वनों को पुनः स्थापित करना।
    • वनीकरण और पुनर्रोपण कार्यक्रम।
  3. वृक्षारोपण (Afforestation):

    • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियान।
    • सरकार की "ग्रीन इंडिया मिशन" जैसी योजनाएं।
  4. संवेदनशील क्षेत्र संरक्षण (Conservation of Critical Habitats):

    • वन्यजीव गलियारों और पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा।
  5. जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation):

    • जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए वनों का उपयोग।
    • कार्बन सिंक बढ़ाने के लिए प्रयास।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठन:

राष्ट्रीय संगठन:

  1. वन सर्वेक्षण विभाग (Forest Survey of India):

    • वनों के क्षेत्र और स्थिति का आकलन।
  2. भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India):

    • वन्यजीव संरक्षण और अनुसंधान।
  3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal - NGT):

    • पर्यावरण संरक्षण और वन कानूनों का क्रियान्वयन।

अंतरराष्ट्रीय संगठन:

  1. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP):

    • सतत विकास और पर्यावरणीय मुद्दों पर काम करता है।
  2. विश्व वन्यजीव कोष (WWF):

    • जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण।
  3. यूनेस्को (UNESCO):

    • बायोस्फीयर रिजर्व के संरक्षण में सहयोग।

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संधियां और समझौते:

  1. पेरिस समझौता (Paris Agreement), 2015:

    • जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए।
    • वनों को कार्बन सिंक के रूप में उपयोग करना।
  2. क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol):

    • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए।
  3. बायोलॉजिकल डायवर्सिटी कन्वेंशन (CBD):

    • जैव विविधता संरक्षण।
    • सतत उपयोग और लाभों का समान वितरण।
  4. यूएन रेड (UN-REDD):

    • वनों की कटाई और क्षरण से होने वाले उत्सर्जन को कम करना।

भविष्य की चुनौतियां और सुझाव:

चुनौतियां:

  1. वनों का अतिक्रमण (Encroachment on Forests):

    • शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण वनों का क्षरण।
  2. जलवायु परिवर्तन:

    • ग्लोबल वार्मिंग और चरम मौसम की घटनाएं।
  3. जैव विविधता की हानि:

    • वनों की कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन।
  4. वित्तीय और तकनीकी बाधाएं:

    • वनों के संरक्षण और पुनर्विकास के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी।

सुझाव:

  1. सशक्त वन कानून (Stringent Forest Laws):

    • अवैध कटाई और अतिक्रमण को रोकना।
  2. स्थानीय भागीदारी:

    • स्थानीय समुदायों और पंचायतों को वन संरक्षण में शामिल करना।
  3. नवीन तकनीकों का उपयोग:

    • ड्रोन और जीआईएस तकनीक का उपयोग वनों की निगरानी के लिए।
  4. शिक्षा और जागरूकता:

    • वनों के महत्व पर जन-जागरूकता अभियान।

निष्कर्ष:

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019 ने देश में वनों और वृक्षों की वर्तमान स्थिति पर गहन विश्लेषण प्रदान किया है। यह रिपोर्ट वनों के संरक्षण और सतत प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। वनों को बचाने और उनका सतत उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सरकार, संगठनों, और नागरिकों का सामूहिक प्रयास आवश्यक है।


Unlock Full Unit & Study Features

Sign in to highlight text, create saved notes, ask the AI Tutor questions, and access all units.

Sign InRegister