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/Ancient India (SSC, Railway, Police & All State exam)/Chapter 11
Ancient India (SSC, Railway, Police & All State exam)Chapter Unit

विदेशी शासन

परिचय:

मौर्य और मौर्योत्तर काल के पतन के बाद भारत में विदेशी शासकों का प्रभाव बढ़ा। उत्तर-पश्चिमी सीमाओं से कई विदेशी आक्रमणकारी आए और भारत में अपना शासन स्थापित किया। इन शासनों ने भारतीय राजनीति, समाज, और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया। विदेशी शासन मुख्य रूप से ग्रीक, शक, पार्थियन, और कुषाण शासकों से संबंधित है।


1. यूनानी (ग्रीक) शासन (326 ईसा पूर्व – 2वीं शताब्दी ईसा पूर्व):

(i) सिकंदर का आक्रमण (326 ईसा पूर्व):

  • सिकंदर महान ने झेलम और चिनाब नदियों के बीच स्थित क्षेत्र पर विजय प्राप्त की।
  • पोरस (पुरु) के साथ युद्ध लड़ा और उसे हराया।
  • सिकंदर ने भारत में कुछ ग्रीक प्रशासकों को छोड़ दिया, जिन्होंने उसकी मृत्यु के बाद स्वतंत्र राज्यों का गठन किया।

(ii) इंडो-ग्रीक शासन:

  • सिकंदर के जनरलों ने भारत में इंडो-ग्रीक साम्राज्य की स्थापना की।
  • प्रमुख शासक:
    • मिनांडर (मिलेन्द्र):
      • बौद्ध धर्म का अनुयायी।
      • नागसेन से चर्चा का उल्लेख "मिलिंद पन्हो" में मिलता है।

(iii) योगदान:

  • भारतीय समाज में यूनानी कला और संस्कृति का समावेश।
  • सिक्कों का प्रचलन: ग्रीक शासकों ने सुंदर और विशिष्ट मुद्राएँ जारी कीं।
  • भारतीय गणित और खगोलशास्त्र पर ग्रीक प्रभाव।

2. शक (Scythian) शासन (2वीं शताब्दी ईसा पूर्व – 4वीं शताब्दी ईस्वी):

(i) शक शासन का उदय:

  • शकों ने ग्रीक शासकों को पराजित कर भारत में सत्ता स्थापित की।
  • क्षेत्र:
    • पश्चिमोत्तर भारत, गुजरात, और सौराष्ट्र।

(ii) प्रमुख शासक:

  • मोगा (मौख): पहला शक शासक।
  • नहपान:
    • पश्चिमी भारत में शक्तिशाली शासक।
    • सातवाहन शासकों से संघर्ष।

(iii) प्रशासन और योगदान:

  • भारतीय प्रशासनिक प्रणाली को अपनाया।
  • शक-क्षत्रप प्रणाली:
    • राज्यों को छोटे-छोटे क्षेत्रों (क्षत्रप) में विभाजित किया।

(iv) पतन:

  • शकों को सातवाहन और बाद में गुप्त शासकों ने हराया।

3. पार्थियन (Parthian) शासन (1वीं शताब्दी ईस्वी):

(i) शासन का विस्तार:

  • पार्थियन शासकों ने उत्तर-पश्चिम भारत में शासन किया।
  • गांधार और पंजाब क्षेत्र पर अधिकार।

(ii) प्रमुख शासक:

  • गोंडोफर्नेस:
    • प्रसिद्ध पार्थियन शासक।
    • ईसाई परंपरा के अनुसार, थॉमस नामक प्रचारक उनके शासनकाल में भारत आए।

(iii) योगदान:

  • गंधार कला का संरक्षण।
  • बौद्ध धर्म के प्रचार में सहायता।

(iv) पतन:

  • पार्थियनों को कुषाण शासकों ने पराजित किया।

4. कुषाण शासन (30 ईसा पूर्व – 250 ईस्वी):

(i) कुषाण साम्राज्य का उदय:

  • कुषाण वंश की स्थापना मध्य एशिया के योद्धा कबीले ने की।
  • साम्राज्य का विस्तार गांधार, पंजाब, और उत्तरी भारत तक हुआ।

(ii) प्रमुख शासक:

  1. कुजुल कडफिसस (Kujula Kadphises):

    • कुषाण साम्राज्य का संस्थापक।
    • अफगानिस्तान और गांधार क्षेत्र पर अधिकार।
  2. विम कडफिसस (Vima Kadphises):

    • भारत में कुषाण साम्राज्य का विस्तार।
    • सिक्कों की प्रणाली विकसित की।
  3. कनिष्क (78-144 ईस्वी):

    • सबसे महान कुषाण शासक।
    • राजधानी: पेशावर और मथुरा।
    • शक संवत का प्रारंभ।

(iii) कनिष्क का योगदान:

  • धार्मिक संरक्षण:

    • महायान बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया।
    • चौथी बौद्ध संगीति (कश्मीर) का आयोजन।
    • बौद्ध धर्म का प्रसार चीन और मध्य एशिया तक।
  • कला और स्थापत्य:

    • गंधार कला शैली का विकास।
    • यूनानी और भारतीय कला का मिश्रण।
    • बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण।
  • व्यापार:

    • सिल्क रूट के माध्यम से व्यापार।
    • भारत, चीन और रोमन साम्राज्य के बीच संपर्क।

(iv) पतन:

  • कुषाण साम्राज्य का पतन 250 ईस्वी के आसपास हुआ।
  • कमजोर उत्तराधिकारियों और आंतरिक संघर्षों के कारण साम्राज्य विभाजित हो गया।

5. शक-क्षत्रप शासन:

(i) शक क्षत्रप प्रणाली:

  • शकों ने पश्चिम भारत में शासन को छोटे-छोटे राज्यों (क्षत्रप) में विभाजित किया।
  • शासक को क्षत्रप और उसके उत्तराधिकारी को महाक्षत्रप कहा जाता था।

(ii) प्रशासन:

  • स्थानीय प्रशासनिक प्रणाली को अपनाया।
  • कर प्रणाली और व्यापार मार्गों का विकास।

(iii) कला और स्थापत्य:

  • शकों ने गुफा वास्तुकला और स्तूपों का निर्माण किया।
  • उदाहरण:
    • अजंता की गुफाएँ।
    • सांची स्तूप।

(iv) पतन:

  • शकों को सातवाहन और गुप्त शासकों ने पराजित किया।

6. पार्थियन शासन का महत्व:

(i) गंधार कला का विकास:

  • पार्थियनों ने गंधार कला को संरक्षण दिया।
  • गंधार क्षेत्र भारतीय और यूनानी कला का संगम बना।

(ii) धर्म और संस्कृति:

  • पार्थियनों ने बौद्ध धर्म के प्रसार में मदद की।
  • भारतीय समाज में सहिष्णुता और विविधता को प्रोत्साहन दिया।

(iii) आर्थिक योगदान:

  • व्यापार मार्गों पर नियंत्रण।
  • गांधार और तक्षशिला व्यापार के प्रमुख केंद्र बने।

7. गंधार कला:

(i) विशेषताएँ:

  • गंधार कला यूनानी, रोमन और भारतीय कला का मिश्रण थी।
  • मुख्य विषय:
    • बुद्ध और बौद्ध धर्म।
    • मूर्तियों में यूनानी शैली के वस्त्र और अभिव्यक्ति।

(ii) प्रमुख केंद्र:

  • तक्षशिला, मथुरा, पेशावर।

(iii) योगदान:

  • भारतीय कला को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली।
  • बौद्ध धर्म के प्रचार में सहायक।

8. हूण शासन (5वीं-6वीं शताब्दी ईस्वी):

(i) परिचय:

  • हूण मध्य एशिया के एक आक्रामक योद्धा समुदाय थे।
  • 5वीं शताब्दी ईस्वी में उन्होंने उत्तर-पश्चिमी भारत में आक्रमण किया और गुप्त साम्राज्य को कमजोर किया।

(ii) प्रमुख शासक:

  1. तोर्माण:

    • भारत में हूणों का पहला महत्वपूर्ण शासक।
    • उसने पंजाब और गांधार पर अधिकार किया।
  2. मिहिरकुल:

    • तोर्माण का उत्तराधिकारी और सबसे क्रूर हूण शासक।
    • बौद्ध धर्म के विरुद्ध और ब्राह्मण धर्म का समर्थक।
    • मिहिरकुल ने कश्मीर और मालवा पर शासन किया।

(iii) परिणाम और पतन:

  • हूणों के आक्रमण से गुप्त साम्राज्य का पतन हुआ।
  • भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था में अस्थिरता।
  • 6वीं शताब्दी में राजा यशोधर्मन (मालवा) और बाद में गुप्त शासकों ने हूणों को पराजित किया।

9. विदेशी शासन का भारतीय राजनीति पर प्रभाव:

(i) राजनीतिक परिवर्तन:

  • विदेशी शासकों के कारण उत्तर-पश्चिमी भारत में राजनीतिक अस्थिरता।
  • गुप्त साम्राज्य और क्षेत्रीय राज्यों के पतन में योगदान।

(ii) प्रशासनिक योगदान:

  • विदेशी शासकों ने भारतीय प्रशासनिक प्रणाली को अपनाया।
  • क्षत्रप प्रणाली: शकों और पार्थियनों ने प्रांतीय प्रशासन को सुदृढ़ किया।

(iii) सैन्य संगठन:

  • विदेशी शासकों ने भारतीय सेना में रथ, घोड़ों और हाथियों का उपयोग बढ़ाया।
  • भारतीय सैन्य रणनीतियों पर विदेशी प्रभाव।

10. विदेशी शासन का भारतीय समाज और धर्म पर प्रभाव:

(i) सामाजिक प्रभाव:

  • विदेशी शासकों के भारतीय समाज में सम्मिलन से संस्कृति में विविधता बढ़ी।
  • मध्य एशिया और यूनानी संस्कृति का प्रभाव।

(ii) धर्म पर प्रभाव:

  1. बौद्ध धर्म का प्रसार:

    • कुषाण और शकों ने बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया।
    • गंधार कला के माध्यम से बौद्ध धर्म का प्रचार।
  2. जैन धर्म और ब्राह्मण धर्म:

    • शकों और पार्थियनों ने ब्राह्मण धर्म और जैन धर्म को भी संरक्षण दिया।
    • हूणों ने ब्राह्मण धर्म को बढ़ावा दिया।

11. विदेशी शासन का भारतीय कला और संस्कृति पर प्रभाव:

(i) गंधार कला:

  • यूनानी और भारतीय कला का संगम।
  • बुद्ध की मूर्तियाँ और बौद्ध धर्म का प्रचार।

(ii) स्थापत्य कला:

  • स्तूप, विहार और चैत्यों का निर्माण।
  • शकों और कुषाणों ने भारतीय स्थापत्य को समृद्ध किया।

(iii) साहित्य:

  • संस्कृत, प्राकृत, और पालि में साहित्य की रचना।
  • बौद्ध धर्म से जुड़े ग्रंथों का लेखन।

12. विदेशी शासन का आर्थिक प्रभाव:

(i) व्यापार का विकास:

  • विदेशी शासकों ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों को पुनः सक्रिय किया।
  • सिल्क रूट: भारत, चीन और रोमन साम्राज्य के बीच व्यापार।

(ii) मुद्रा प्रणाली:

  • यूनानी, शकों, और कुषाणों ने भारतीय मुद्रा प्रणाली को संगठित किया।
  • सुंदर और मानकीकृत सिक्कों का प्रचलन।

13. निष्कर्ष:

विदेशी शासन भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण चरण था।

  • सकारात्मक प्रभाव:

    • गंधार कला, गुफा वास्तुकला, और सिक्कों का विकास।
    • बौद्ध धर्म का अंतर्राष्ट्रीय प्रसार।
  • नकारात्मक प्रभाव:

    • विदेशी आक्रमणों ने राजनीतिक अस्थिरता और स्थानीय राज्यों के पतन में योगदान दिया।
    • उत्तर-पश्चिमी भारत पर लगातार आक्रमण से आर्थिक और सामाजिक अस्थिरता।

इस काल ने भारत को सांस्कृतिक विविधता और अंतर्राष्ट्रीय संपर्क के माध्यम से समृद्ध किया और गुप्त साम्राज्य जैसे महान राज्यों के उदय का मार्ग प्रशस्त किया।

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